खोता हुआ बसंत
समाचारपत्र के रंगीन पृष्ठ पर सजी धजी लिपस्टिक लगाई चेहरे को फोटोजेनिक बनाती /
कागजो के रंगीन फूलों से सजे,प्लास्टिक के झूले पर बैठ अपना मादक यौवन दिखाती /
शारीर को ढंकने को गहने और उघाड़ने के लिए पहने साड़ी के पीले रंग पर आँखे रूक जाती है /
अब सुधि पाठक भी समझ जाता है ,कि यह पृष्ठ बसंत की पूरी कीमत वसूलने छपता है /
वैसे भी संपादक के लिए बसंत तो रंगीन पृष्ठ छापने केलिए एकअच्छा बहाना है बन गया /
खेत से जन्म लेता पीली सरसो का सुनहरा बसँत बनावटी चेहरों कि नुमाइशों में खो गया /
प्रसाद ,महादेवीऔर जायसी के अंतर से निकला बसंत बाजारू मीडिया कि भेंट चढ़ गया /
पलास के फूल से और आम के बहार से बरसते बसंत को देखने समय भी कितना तरस गया /
बाग़ में भौरों की तान के साथ गुनगुनाता बसंत ,बृज में कृष्ण की बांसुरी पर थिरकता बसंत /
नवजात मखमली कोंपलो से झांकता बसन्त ,पनघट में पनिहारिन के घड़े से छलकता बसंत /
कहाँ गया कोयल कीगान से झूमता बसंत ,सुबह मीठी धुप के साथ घर आंगन में उतरता बसंत /
मेरी ही चूक सेकहीं खो गया बसंत, बच्चों को अब शायद सपनो में भी नहीं दिख पायेगा बसंत /
समाचारपत्र के रंगीन पृष्ठ पर सजी धजी लिपस्टिक लगाई चेहरे को फोटोजेनिक बनाती /
कागजो के रंगीन फूलों से सजे,प्लास्टिक के झूले पर बैठ अपना मादक यौवन दिखाती /
शारीर को ढंकने को गहने और उघाड़ने के लिए पहने साड़ी के पीले रंग पर आँखे रूक जाती है /
अब सुधि पाठक भी समझ जाता है ,कि यह पृष्ठ बसंत की पूरी कीमत वसूलने छपता है /
वैसे भी संपादक के लिए बसंत तो रंगीन पृष्ठ छापने केलिए एकअच्छा बहाना है बन गया /
खेत से जन्म लेता पीली सरसो का सुनहरा बसँत बनावटी चेहरों कि नुमाइशों में खो गया /
प्रसाद ,महादेवीऔर जायसी के अंतर से निकला बसंत बाजारू मीडिया कि भेंट चढ़ गया /
पलास के फूल से और आम के बहार से बरसते बसंत को देखने समय भी कितना तरस गया /
बाग़ में भौरों की तान के साथ गुनगुनाता बसंत ,बृज में कृष्ण की बांसुरी पर थिरकता बसंत /
नवजात मखमली कोंपलो से झांकता बसन्त ,पनघट में पनिहारिन के घड़े से छलकता बसंत /
कहाँ गया कोयल कीगान से झूमता बसंत ,सुबह मीठी धुप के साथ घर आंगन में उतरता बसंत /
मेरी ही चूक सेकहीं खो गया बसंत, बच्चों को अब शायद सपनो में भी नहीं दिख पायेगा बसंत /
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