Wednesday, November 6, 2013

basant kagaj par

                                               खोता हुआ बसंत  
                                                                                   
 समाचारपत्र के  रंगीन पृष्ठ  पर सजी धजी लिपस्टिक लगाई  चेहरे  को फोटोजेनिक बनाती /      
कागजो   के रंगीन फूलों  से सजे,प्लास्टिक के  झूले पर बैठ अपना मादक  यौवन  दिखाती /
शारीर को ढंकने को  गहने और उघाड़ने के लिए पहने साड़ी के पीले रंग पर आँखे रूक जाती है /
अब सुधि  पाठक भी समझ जाता है ,कि यह पृष्ठ  बसंत  की पूरी  कीमत वसूलने  छपता है  /

वैसे भी संपादक के लिए  बसंत तो  रंगीन  पृष्ठ छापने केलिए एकअच्छा बहाना है  बन गया /
खेत से जन्म लेता पीली सरसो का सुनहरा बसँत बनावटी चेहरों कि नुमाइशों में  खो  गया /
प्रसाद ,महादेवीऔर जायसी  के अंतर से निकला  बसंत बाजारू मीडिया  कि भेंट चढ़ गया /
पलास के फूल से और आम के बहार से बरसते बसंत को  देखने समय भी कितना तरस गया  /

बाग़ में  भौरों  की तान के साथ गुनगुनाता बसंत ,बृज में कृष्ण की बांसुरी पर  थिरकता बसंत /
 नवजात मखमली कोंपलो  से झांकता बसन्त ,पनघट  में पनिहारिन के घड़े से छलकता बसंत /
कहाँ गया कोयल कीगान से झूमता  बसंत ,सुबह मीठी धुप के साथ घर आंगन में उतरता बसंत /
मेरी ही चूक सेकहीं   खो गया बसंत, बच्चों को अब शायद सपनो में भी नहीं दिख पायेगा बसंत /

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