Saturday, May 14, 2011

अन्ना हजारे आंदोलन

*अन्ना ने भ्रष्टाचार के विरुध्द आवाज़ उठाकर समाज मे जाग्रति पैदा कर दी,इसमे कोई शक नही. परंतु किसी वैचारिक क्रांति पहले जनसाधारण को भ्रष्टाचार से विरत करना होगा,जो सहज काम नही है. अन्ना के आंदोलन का नेत्रत्व जिन लोगो के हाथमे है वे पेशेवर एन जी ओ, वकील , या बुद्धिजीवी तो होसकते है, जननेता नही. भ्रष्टाचार जिस तरह उपर सेनिचेतक फैला है,कभी तो लगता है की पूरा देश भ्रष्टाचार का गुलाम हो गया है ,उसे देखते ,जो कुछ अन्ना के द्वारा किया जा रहा है वह बहुत कम
है. आवश्यकता केवल जाग्रति की नही वरन वैचारिक क्रांतिकी की है . उसके लिए गाँधी,विनोबा जैसे समर्पित नेता -कार्यकर्ता चाहिए ,जो अपना घर फूँक कर मिशन में लग सकते हों. अन्ना बिना किसी पूर्वाग्रह के घेरे के बाहर निकलकर नेता और कार्यकर्ता का चुनाव करना होग.नये विश्वनीय सहयोगी चुनने होंगे,अन्यथा
इस क्रांतिकारी विचार की भ्रूण हत्या हो जाएगी. बोफोर्स मुद्दे की असफलता के बाद भ्रष्टाचार समाज का स्वीकार्य अंग बन
गया .यहाँ तक की हवाला भी मुद्दा नही बन पाया. अन्ना अच्छी शुरूवात के लिए अभिनंदन . परंतु हाथ में काँच का काम
लिया है,सर पर कांटो का ताज पहना है . इतिहास में आपका नाम लिख गया है ;पर इबारत क्या होगी,यह भविष्य तय
करेगा.

को सफलता की ओर लेजाने के लिए फेसबूक, नेट, एस,म.स. या कुछ घंटो के लिए भीड़ जुजना पर्याप्त नही है. इसके लिए

1 comment:

  1. आपका लेख अच्छा है .अन्ना जी ने एक शुरुवात की है. लेकिन सभी भारतीय को ये लड़ाई अपने आसपास लड़नी होगी .यद्यपि यह कार्य कठिन है .लेकिन याद रहे आजादी की लड़ाई तो इससे कठिन थी . लेकिन हमने वह जीती थी .

    ReplyDelete